इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट PSLV-C61 : भारत के सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल माने जाने वाले PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) का C61 मिशन असफल हो गया है। यह मिशन 18 मई 2025 को सुबह 5:59 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हुआ था। इसरो को उम्मीद थी कि यह मिशन EOS-09 सैटेलाइट को 524 किमी ऊंची सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित करेगा। हालांकि, लॉन्च के तीसरे चरण में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।
PSLV-C61 मिशन का उद्देश्य क्या था?
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य EOS-09 (Earth Observation Satellite) को एक विशेष कक्षा (Sun-Synchronous Polar Orbit) में स्थापित करना था। यह सैटेलाइट पृथ्वी के संसाधनों, पर्यावरण और कृषि पर नजर रखने के लिए बेहद अहम था।
PSLV रॉकेट : भारत का सबसे सफल लॉन्च व्हीकल
PSLV रॉकेट इसरो का सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल है, जिसकी सफलता दर 95% से भी ज्यादा है। यह चार चरणों में काम करता है:
- पहला चरण (Solid Stage) – सबसे ताकतवर थ्रस्ट देने वाला भाग
- दूसरा चरण (Liquid Stage) – ‘विकास’ इंजन का उपयोग
- तीसरा चरण (Solid Stage) – ऊंचाई और गति में बढ़त देने वाला भाग
- चौथा चरण (Liquid Stage) – अंतिम कक्षा में सेट करने के लिए
पहले जानिए कुछ तकनीकी शब्द :
इस खबर को बेहतर समझने के लिए पहले इन तकनीकी शब्दों की जानकारी जरूरी है:
- पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) : PSLV इसरो का एक बेहद भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल है, जो सैटेलाइट्स को पृथ्वी की कक्षा में, विशेषकर सन-सिंक्रोनस और पोलर ऑर्बिट में स्थापित करता है। यह चार चरणों (सॉलिड → लिक्विड → सॉलिड → लिक्विड) में कार्य करता है।
- ग्राउंड-लिट स्ट्रैप-ऑन मोटर्स : ये सॉलिड बूस्टर मोटर्स रॉकेट के मुख्य कोर से जुड़ी होती हैं और लॉन्च के समय जमीन पर ही इग्नाइट होकर रॉकेट को प्रारंभिक गति देती हैं।
- ऑनबोर्ड इंस्ट्रूमेंटेशन : रॉकेट या सैटेलाइट पर लगे सेंसर जैसे IMU, एक्सलरोमीटर, गायरोस्कोप आदि, जो गति, दिशा, ऊंचाई आदि को मापते हैं और डेटा ग्राउंड स्टेशन को भेजते हैं।
- टेलीमेट्री : एक तकनीक जिसके जरिए रॉकेट से जुड़ा डेटा रियल-टाइम में ग्राउंड स्टेशन तक पहुंचता है, जिससे मिशन की निगरानी की जाती है।
- ग्राउंड-बेस्ड ट्रैकिंग : ग्राउंड स्टेशन, रडार और एंटीना से रॉकेट की स्थिति, दिशा और गति को ट्रैक किया जाता है।
- क्लोज लूप गाइडेंस : यह एक ऑटोमेटेड कंट्रोल सिस्टम होता है, जिसमें रॉकेट रियल-टाइम डेटा के आधार पर अपने ट्रैक और थ्रस्ट को स्वतः समायोजित करता है।
लॉन्च की शुरुआत : सब कुछ सामान्य रहा
PSLV-C61 का शुरुआती चरण सफल रहा।
- ग्राउंड-लिट स्ट्रैप-ऑन मोटर्स और कोर स्टेज ने सामान्य प्रदर्शन किया।
- इसके बाद एयर-लिट स्ट्रैप-ऑन मोटर्स समय पर इग्नाइट हुईं और रॉकेट अपनी तय दिशा में आगे बढ़ा।
- सेकेंड स्टेज में विकास इंजन का प्रदर्शन भी सामान्य रहा।
- ऑनबोर्ड इंस्ट्रूमेंटेशन और ग्राउंड ट्रैकिंग डेटा में कोई अंतर नहीं था।
कहां हुई गड़बड़ी: थर्ड स्टेज में आई तकनीकी समस्या
रॉकेट के तीसरे चरण (PS3), जो कि सॉलिड मोटर है, में समस्या उत्पन्न हुई।
- थर्ड स्टेज का इग्निशन 262.9 सेकंड पर सामान्य रूप से हुआ।
- लेकिन 376.8 सेकंड के बाद टेलीमेट्री डेटा में विचलन (Deviation) आने लगा।
- ऑनबोर्ड इंस्ट्रूमेंटेशन डेटा (ग्रीन लाइन) और ग्राउंड ट्रैकिंग डेटा (यलो लाइन) अलग-अलग दिखने लगे।
- ग्रीन लाइन में जिगजैग पैटर्न और यलो लाइन से अलग दिशा दर्शाई गई, जो संकेत देता है कि सेंसर या नियंत्रण प्रणाली में त्रुटि आई।
संभावित कारण क्या हो सकते हैं?
विश्लेषकों और इसरो द्वारा बताए गए संभावित कारण निम्नलिखित हैं:
- सेंसर फेलियर : IMU, एक्सलरोमीटर या अन्य सेंसर्स से गलत डेटा मिलने पर गाइडेंस सिस्टम रॉकेट को गलत दिशा में मोड़ सकता है।
- एल्गोरिदम एरर : क्लोज लूप गाइडेंस एल्गोरिदम में कोई प्रोसेसिंग एरर हुआ हो सकता है।
- थ्रस्ट की असमानता : थर्ड स्टेज के नोजल या चैम्बर में दबाव की गिरावट के कारण अपेक्षित थ्रस्ट नहीं मिला।
- डेटा ट्रांसमिशन फेलियर : यदि टेलीमेट्री सिस्टम ने सटीक डेटा नहीं भेजा, तो ग्राउंड स्टेशन और रॉकेट के बीच समन्वय बिगड़ सकता है।
अंतिम निर्णय : चौथा चरण सक्रिय लेकिन कक्षा में नहीं पहुंचा
- डेविएशन के कारण रॉकेट ने ट्रैजेक्ट्री को गलत तरीके से एडजस्ट करना शुरू कर दिया।
- हालांकि चौथे चरण (PS4) का इग्निशन हुआ, लेकिन रॉकेट अपने लक्षित पथ से काफी दूर जा चुका था।
- मिशन को समाप्त घोषित कर दिया गया और रॉकेट-सैटेलाइट को सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया गया।
इसरो अध्यक्ष की पुष्टि : तीसरे चरण में चैम्बर प्रेशर गिरा
इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि तीसरे चरण में मोटर चैम्बर का प्रेशर गिर गया था। इसके कारण थ्रस्ट पर्याप्त नहीं बना और मिशन सफल नहीं हो सका। उन्होंने कहा, “हमने एक फेल्योर एनालिसिस कमेटी बनाई है जो टेलीमेट्री, ऑनबोर्ड और ट्रैकिंग डेटा का विश्लेषण करेगी। समिति की रिपोर्ट के बाद ही हम स्पष्ट रूप से बता पाएंगे कि इस असफलता का मूल कारण क्या था।”
मिशन से क्या सीख मिली?
- ऑनबोर्ड और ग्राउंड ट्रैकिंग के बीच समन्वय बहुत जरूरी है।
- सॉलिड स्टेज थ्रस्टर्स की विश्वसनीयता की फिर से समीक्षा करनी होगी।
- टेलीमेट्री और क्लोज लूप गाइडेंस सिस्टम में रीयल-टाइम वैलिडेशन जरूरी है।
PSLV को इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है। यह पहली बार नहीं है जब कोई तकनीकी खराबी सामने आई हो, लेकिन PSLV की सफलता दर अब तक लगभग 95% रही है। इस असफलता को वैज्ञानिक रूप से समझना, उसके कारणों को दूर करना और भविष्य के मिशनों को बेहतर बनाना इसरो की प्राथमिकता होगी।






